सेब और बेर जैसे मीठे नए बड़े-बड़े बेर के फल की मांग इंदौर, अहमदाबाद, वडोदरा, मुंबई समेत बड़े शहरों में बढ़ रही है। बेर के खरीदार अधिकांश निजी कंपनियां है। वे इन्हें विदेशों में निर्यात करती हैं। इसके आकर्षक रूप व स्वाद के कारण स्थानीय बाजारों में इसकी मांग बढ़ रही हैं। पहले साल में एक पौधे से 60 से 70 किलो का उत्पादन मिला। बाजार में इसका भाव 45 से 50 रुपए किलो तक
जाता है।
एक और अत्यंत दुखद सूचना, कवि केदारनाथ सिंह को विनम्र श्रद्धांजलि। अब स्मृति-शेष भर। एक-एक कर उनका अचानक चले जाना। ठीक दो दिन पहले व्यंग्यकार सुशील सिद्धार्थ। उससे पूर्व कथाकार दूधनाथ सिंह, कवि चंद्रकांत देवताले, मनु शर्मा, धर्मशील चतुर्वेदी, पथनी पटनायक, नीलाभ अश्क, रवींद्र कालिया, वीरेन डंगवाल, कैलाश वाजपेयी, यूआर अनंतमूर्ति, अरुण प्रकाश, राजेन्द्र यादव, इंदिरा गोस्वामी, श्रीलाल शुक्ल, आचार्य जानकी वल्लभ शास्त्री, कितने-कितने नाम, भारतीय साहित्य को गहरा आघात। सचमुच 'हिंदी की सबसे ख़ौफ़नाक क्रिया है', नम आंखों का यह सिलसिला।

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